Sunday, April 19, 2026
पचपदरा रिफाइनरी
गाँव के कदम... शहर की ओर बढ़ रहे है। गाँव भी रूकने को तैयार नहीं है। उसे शहर बनना है। सबको बड़ा बनना है। एक तरह से सही भी है.. जिंदगी भी यही सीखाती है.. कुछ बड़ा करना है... वहीं नहीं रहना है.. पानी भी एक जगह जमा रह जाए तो वहाँ काई जम जाती है। प्रकृति की एक-एक चीज हमें चलायमान रहने की सीख देती है. कुछ नया करने की सीख देती है। यही सीख लेकर देश के छोटे से-छोटे गाँव बड़ा बन रहे है। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में एक नई तेल रिफाइनरी बनकर तैयार हुई है। ये राजस्थान की पहली रिफाइनरी है.. इस जगह से करीब 73 किलोमीटर दूर मंगला में क्रूड ऑयल मिला है जो आधार बना इस रिफाइनरी के खुलने का... और यही आधार बनेगा इस छोटे से गाँव के बड़े शहर और फिर एक बड़े नगर में बनने का। गाँव के शहर बनने की रूप-रेखा तैयार हो चुकी है। गाँव से पलायन हो रहा होगा लेकिन एक उभरते शहर की ओर फिर से लोग वापस जा सकते हैं। इस तरह जहाँ रोजी-रोटी का साधन होता है वहाँ अपने धनी आबादी बसने लगती है। अभी पचपदरा रिफाइनरी बनकर तैयार हुई है और एक-दो दशक बाद अगर वापस जाना हुआ तो आज की खाली सड़कें, दूर-दूर तक दिखने वाली खाली जमीनें.. न जाने कहाँ गायब हो जाएंगी.. नए शहर... नए नगर की आगोश में पुराना गाँव समा जाएगा. गाँव के शहर बनने की प्रक्रिया पूरी होगी।
Thursday, March 26, 2026
अमिताभ बच्चन की फिल्मों के नाम खोजिए...
आख़िरकार एक कुली से शहंशाह बनने का उनका आखिरी रास्ता जो था. उनकी परवरिश भी ऐसी हुई कि कोई दीवार कोई जंज़ीर उनके रास्ते का पत्थर नहीं बन सकी. वह राजनीति में इंक़लाब लाना चाहते थे लेकिन उन्हें समझ आ गया यहॉ बंधे हाथ कुछ नहीं किया जा सकता. उन्हें राजनीति से अलग किया दो अनजाने राम बलराम ने
अभी भी झिझक है, अभी भी हिचक है,
अभी भी झिझक है, अभी भी हिचक है,










सुप्रभात 


ॐ ब्रह्माण्ड के अंदर नियमित ध्वनि
अंतरिक्ष तथा वायुमंडल में सौरमंडल के चारों ओर ग्रहों की गति से जो शोर हो रहा है वह ॐ की ध्वनि की परिणति है। ॐ ब्रह्माण्ड के अंदर नियमित ध्वनि है। सूक्ष्म इंद्रियों द्वारा ध्यान लगाने पर इसकी अनुभूति हो सकती है।
गणेश की पूजा पहले क्यों?
हिन्दू धर्म ग्रंथों में प्रसंग है कि भगवान शिव के विवाह में सबसे पहले गणपति की पूजा हुई थी। इसमें सांसारिक नजरिए से एक जिज्ञासा यह पैदा होती है जब भगवान गणेश शिव-पार्वती के पुत्र हैं तो उनके विवाह के पहले ही उनकी पूजा कैसे की गई? दरअसल लोक मान्यताओं में गणेश और गणपति एक ही देवता है। है। किंतु धर्म ग्रंथ में गणेश और गणपति को दो अलग-अलग रूप के बारे में बताया गया हैं। जानते हैं यह रोचक तथ्य -










ध्यान और मॉडर्न सामाजिक व्यवस्था
एक समय था जब ध्यान सिर्फ उनके लिये था जो संसार से ऊब कर वैरागी हो गये थे। अब उनके लिये संसार में कोई रस न था और इस वजह से वह सुख और दुख के खेल के बाहर किसी महाआनंद की तलाश में थे।
हार या जीत... सोच पर करती है निर्भर











अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है, हार या जीत सोच पर निर्भर करती है । मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है । कल्पना ही सब कुछ है यह जीवन के आगामी आकर्षणों का पूर्व दर्शन है । मनुष्य को सोचने और समझने की अद्भुत क्षमता का जो वरदान प्रभु से मिला है वह किसी अन्य प्राणी को नहीं मिला है । प्रश्न यह उठता है हम इस अद्भुत क्षमता का कितना फायदा उठाते हैं ?*
कर सकते हैं निर्माण :*
जिंदगी बाह्य घटनाओं, परिस्थितियों, कुदरत और हमारे पुरुषार्थ का स्वतंत्र मिश्रण है । कुदरत के प्रभाव को हम नहीं टाल सकते हैं परंतु कुम्हार की तरह कुछ निर्माण तो अवश्य ही कर सकते हैं । अकाल, भूकंप, बीमारी और दुर्घटनाओं को टाला तो नहीं जा सकता है परंतु हताश होने के बदले उनसे समझौता तो हमें अवश्य ही करना पड़ेगा । हाँ, बुरे कर्म और बुरी आदतों से तो कम से कम हम अपने को बचा ही सकते हैं ।
जरूरी है मन के भावों और आवेगों पर नियंत्रण :*
हम व्यर्थ ही अनेक प्रकार के काल्पनिक भय निर्माण कर, उनके वशीभूत हो अपनी जीवन- शक्ति नष्ट करते हैं । वास्तव में यह कागज के शेर हैं । आज हमें दृढ़ संकल्प से अपने मनोभावों और आवेगों पर नियंत्रण स्थापित करना ही होगा । क्योंकि प्रत्येक असफलता से यह सीखना होगा कि हमने सफलता के मार्ग से एक अवरोध को हटा दिया है । क्या अब्राहम लिंकन, एडिसन, गांधीजी जैसे हजारों लोगो ने असफलता से हार कर पलायन वृति अपनाई ? नहीं । उन्होंने अपनी असफलता का बार-बार पुनर्मूल्यांकन किया और सफलता हासिल कर जीवन में विजय के प्रति लोगों के सामने एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखा । जब वे सफल हो सकते हैं तो हम क्यों नहीं ?
अवरोध को चुनौती और मनोरंजन समझना :*
जीवन सफलता और असफलता का अद्भुत मिश्रण है । यह वह बाधा दौड़ (एक प्रकार का खेल) है जहां असफलता का अवरोध बार बार हमारे सामने आ खड़ा होता है परंतु हमें अवरोध के सामने हिम्मत हार कर घुटने टेकने नहीं हैं । प्रत्येक अवरोध को चुनौती और मनोरंजन समझकर, उमंग-उत्साह के साथ पुनः प्रयत्न के संकल्प की छलांग लगाते लगाते सफलता को अंत में प्राप्त कर लेना ही है । 'बस एक और प्रयास' यह रीति सहज ही सफलता दिला देती है ।
नया पाने के लिए नया करना होगा :*
हमारी शान इस बात में नहीं होनी चाहिए कि हम सदा विजय हों बल्कि इसमें है कि गिरने के बाद पूरे उत्साह से फिर से जीतने के लिए उठ खड़े हो सके । कहते हैं भगवान का दिया हुआ कभी अल्प नहीं होता, टूट जाए जो बीच में वह संकल्प नहीं होता, जिंदगी में कभी असफलताओं से हार मत मानना क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता ।
बताना नहीं है करके दिखाना है :*
मनुष्य परिस्थिति की नहीं परिस्थिति मनुष्य की रचना है । यदि हम अपने मन की शक्ति को जागृत कर ले तो दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं । हम यह नहीं सोचे कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे, हम क्या कर सकते हैं दुनिया को नहीं बताना है करके दिखाना है । एक रशियन कहावत है "पहले कीजिए, फिर बताइए ।"
केवल सफलता के बारे में सोचना :*
असफल होने के कारणों की सूची बनाकर किसी लक्ष्य को हासिल करना असंभव है । ऐसा करने से मन की पूरी शक्ति असफलता के चित्र बनाने में केंद्रित हो जाती है और अंततः असफलता ही हाथ लगती है । इसीलिए जीवन के उन क्षणों को याद कीजिए जब हम सफल हुए थे । केवल सफलता के बारे में सोचना और सफल होने के कारणों की सूची बनाना । ऐसा करने से हम उन सफल तरंगों को ब्रह्मांड तक पहुंचा रहे हैं और ब्रह्मांड हमको वही देगा जो हम चाहते हैं ।
समय किसी के लिए नहीं रुक सकता :*
हालात बदलते एक पल भी नहीं लगता । किसी भी वक्त परिस्थिति विपरीत हो सकती है । समय किसी के लिए नहीं रुकता । अगर हम अनुकूल परिस्थिति में हैं तो स्वयं को भाग्यशाली समझना और उस परमपिता परमात्म ऊर्जा के स्त्रोत को धन्यवाद देना और तुरंत काम में लग जाना चाहिए ।
हमें जीतने की आदत बनानी होगी :*
हम जीवन की मुश्किलों से घबराकर लक्ष्य को भूल जाते हैं । कई ओलंपियंस हैं जिनके जीवन में आए कठिन हालातों ने उन्हें हताश किया था परंतु वे टूटे नहीं । हर बार नए सिरे से जुट गए । आत्मविश्वास के लिए अभ्यास जरूरी है, जितना जल्दी हो सके, जीतने की आदत बनाना होगी, लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करना होगा ।
हार का सामना हर किसी ने किया है पर जीत उसी की हुई है जिसने संघर्ष जारी रखा । यदि लक्ष्य हासिल करना है तो भावनात्मक रूप से मजबूत बनना पड़ेगा, नहीं तो मेहनत पर पानी फिर जाएगा । दुनिया में हर इंसान को मनचाही चीजें नहीं मिलती । जैसी भी परिस्थिति हो, जीतने के लिए जुनून चाहिए ।










