Sunday, February 14, 2010

पापा का गुस्सा

"पापा को गुस्सा क्यों आता हैं?" - घर के सभी लोग इस बात से परेशान रहते थे। इसका साधारण-सा जवाब था- पापा को सभी काम तरीके से चाहिए होता था, खुद भी प्रैक्टिकल आदमी थे। कभी कुछ चीजों के इधर से उधर रखने पर, काम समय पर ना होने पर या किसी के झूठ बोलने पर - कमोबेश इन्हीं परिस्थितियों में उन्हें गुस्सा आता था। जो जायज भी था। हम पर भी कितनी बार गुस्सा हुए। एक बार सन् 88 में एक थप्पड़ भी जड़ दिया था। दो अप्रैल का दिन था मैं जनता टॉकीज के सामने लगे कल से एक लोटे में पीने का पानी लेकर आ रहा था। रास्ते में मेरे ही मकान मालिक के घर में रहने वाले एक स्टूडेंट ने पानी माँगा, मैंने गुस्से में पानी गिरा दिया और रोते-रोते घर पहुँचा, इसी बात पर गुस्सा होकर एक चाँटा मारा। क्योंकि मैं उनके कोप से बचते चले आ रहा था। लेकिन फिर भी उनके गुस्से का शिकार हो ही गया। फिर कितनी बार मुझ पर गुस्सा हुए होंगे लेकिन हाथ नहीं उठाया। हाँ, हाल में 2 मार्च 2006 को शायद हाथ छोड़ा था.. मैं इसका जिक्र किसी गलत भाव से नहीं कर रहा बल्कि उनका तो मुझ पर पूरा अधिकार था.. गुस्सा निकालना भी जरूरी था मुझ पर... नहीं तो इसका भी अनुमान नहीं ले पाते।

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