काफी दिनों के बाद कुछ बातें लिख रहा हूँ पापा से रिलेटेड। पापा के जाने के बाद शुरूआत के दिनों में सपनों में पापा को देखना काफी अच्छा लगता था, वो बात करते हुए दिखायी देते या हमसे ही बात करते हुए दिखते। उनकी आवाज गूँजती हुई हर सपने में दिखायी देती। एक बार तो पूरा चेहरा दिखायी दिया, इन सब बातों की चर्चा मैं फोन पर मम्मा से किया करता था। एक भावनात्मक लगाव के कारण जाने के बाद पापा का सपनों में आना सामान्य सी बात हो सकती है, लेकिन इधर काफी दिनों से एकबार भी दिखायी नहीं दिये। सपनों में आजकल घर या घर से जुड़े लोग ज्यादा दिखायी दे रहे है। कुछ गलत भी घटित हो रहा है,इसलिए सपने मुझे बार-बार आगाह कर जाते है। सपनों का जिक्र करने के बाद वो तो एकाएक गायब ही हो जाते है। कभी-कभी इसे अच्छा माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यह सही नहीं समझा जा सकता है। अगर इससे किसी चीज का पूर्वाभास हो जाता है तो यह वाकई अच्छा संदेश है। एक तरह से पिताजी का सपनों में ना आना... ऐसा लगता है, वे हमसे काफी दूर चले जा रहे है। जीवन की आपाधापी को सहजता से स्वीकार करते हुए काफी कुछ सीखने वाले पापा की याद जिंदगी भर बनी रहेगी, ये कभी दूर नहीं होने देगी, यकीन है।
( 13 जून 2008 को लिखा गया)
( 13 जून 2008 को लिखा गया)
पिता के सपने भले ही कुछ समय के लिए ना आए...लेकिन उनसे जो सीख मिली हो वह नही भूलनी चाहिए....ऐसा कई बार हुआ है कि बहुत सालो बाद पुन: सपने मे आ जाते हैं यह अपना अनुभव बता रहा हूँ सपने पूर्वाभास.भी देते हैं.....
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