एकाएक पापा के सभी सवाल दिमाग में आ गए जो उन्होंने बड़ी भाभी से किए थे, जब पापा और हम भाभी को देखने के लिए गए थे क्योंकि बड़ी भाभी ने उन सभी सवालों को नीरज भैया के लिए जो लड़की फिक्स की गयी, उनसे पूछने को कहा। और इस क्रम में मैंने भी टेलीफोन से ही पचास मिनट का लंबा, चौड़ा इंटरव्यू ले डाला। पापा के सवाल तो थे ही, मैंने अपनी तरफ से भी काफी सवाल पूछ लिए। बी.एस.सी. बॉटनी की छात्रा थी, इसलिए कुछ बॉटनी का इंटर का ज्ञान भी हमें काम आ गया। पापा ने सवालों के अलावा अंग्रेजी व हिन्दी में लिखाकर भी देखा था, वह काम मेरे दिमाग में है, इन फ्यूचर कहीं पॉसिबल हो सके, तो वो भी संभव हो जाएगा। मेरे द्वारा लिए जा रहे इंटरव्यू के दौरान उनके द्वारा कहा गया कि अरे इतना सवाल तो लोग हमें देखने आए तो भी नहीं किये, तो मैंने कहा अभी तो ये शुरूआत है, अभी बीच तो आने दीजीए, फिर बातें खत्म होगी। इंटरव्यू लेने वाला इंटरव्यू लेते लेते परेशान था और देने वाला देते-देते। बड़ी भाभी की जिद पर इंटरव्यू लिया गया। पापा के प्रश्नों का उन्होंने भी बखूबी जवाब दिया था, सवालों की भी खूब तारीफ हुई थी। अंततः वही सब सवाल मेरे जेहन में उभरे और मैंने अपनी नयी भाभी से पूछ डाले। कुल मिलाकर अच्छा इंटरव्यू रहा।
( 8 जुलाई 2008 को लिखा गया)
( 8 जुलाई 2008 को लिखा गया)
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