Thursday, February 11, 2010

बात भी न कर सके

8 अप्रैल '07 को यूँ ही रात में 10 बजे के करीब घर पर और नीरज भैया के मोबाइल पर मिस कॉल किया। घर से मम्मी का फोन आया कि पापा और बॉबी पटना गए हुए है वो कॉलेज का काम है या आरटीआई का ऐसा ही कुछ है इसी बीच पटना से कोई कॉल कर रहा था क्योंकि लैंडलाइन का नंबर था 0612 कोड आ रहा था मैंने मम्मी को कहा कि लगता है बॉबी भैया का फोन आ रहा है फिर फोन पर वेटिंग कॉल रिसीव किया। उधर बॉबी भैया ही थे। मैनें बातें की। हाल ही में लोकसभा चैनल में इंटर्नशिप के लिए इंटरव्यू देकर आया था, उसके बारे में बताया। और सब चीजों को लेकर चार-पाँच मिनट बातचीत हुई। मुझे लगा कि कही बूथ से कर रहे है इसलिए मैं पूछ नहीं सका कि पापा से बात करनी है। यूँ ही टाल गया। मुझे क्या पता था कि पापा भी वहीं थे। गुप्ताजी के घर से ही फोन किया गया था। बाद में यह बात पता चली। अगर बात हो जाती, तो अंतिम बार तो सुने होते। उससे पहले जहाँ तक याद आता है 15 दिन पहले कभी बात हुई होगी वो भी इतने तक ही सीमित कि पैसा भेज दे क्या? क्या हाल-चाल है ?एक छोटी वार्ता पर हमेशा खत्म हो जाती कॉल। लेकिन उस दिन बात न कर सके इसका अफसोस जिंदगी भर रहेगा।

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