सबसे बड़ी बात .. पहले तो मन करता कि किसी तरह घर निकल जाऊँ। छुट्टी के दिनों में घरवालों से मिलकर आ जाऊँ लेकिन एग्जामस ( फाइनल,PGDRTVJ) के बाद हिम्मत ना हो सकी कि घर जाऊँ। अब तो जी ही नहीं करता... यहीं कुछ मीडिया फिल्ड में अच्छा हो जाए .. अपने आप को स्थापित कर लूँ.. तब ही जाकर आत्मसंतुष्टि मिलेगी। एक तो उम्र भी बीतती जा रही है और अभी तक आत्मनिर्भर न होना भी एक समस्या ही है। घर की स्थिति अभी भी जस की तस है। अगर यह कोर्स नहीं किया होता तो मेरी क्या स्थिति होती? यह सोच कर भी रूह काँप जाती है। यहाँ एक जिंदगी को जीने की सोच है, दिशा है। कुछ कर गुजरने की चाहत है। घर पर जाने का जी नही करता। किस मुँह से जाऊँ। अब तो स्ट्रगल पीरियड भी शुरू हो चुका है.. एक जरा सी भी यहाँ से मैं कहीं गया तो काफी दिक्कत आ जाएगी। देखिए.. वैसे क्या होता है .. अगर जॉब होगी तो एक दिशा एक इंगेजमेंट हो जाएगी फिर तो जी भी लगा रहेगा।
Thursday, February 11, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
good yaar achha hai tum bhi meri company k ho
ReplyDelete