3 अगस्त के स्वप्न की बात करूँ तो एक ऐसा तेज पापा के चेहरे पर पाया, उसी स्वप्न में पूरा मुख देखा अन्यथा इससे पहले जितने स्वप्न आते उसमें घर में मानो मैं हूँ जो कार्य व्यापार चलता था और पापा की भूमिका थी॥ उन्हीं चीजों को देखता ... काफी अच्छा लगता । लेकिन उस दिन तो मानो ऐसा लगा स्वयं प्रकट हुए। कुछ किंकर्तव्यविमूढ़ता वाली स्थिति थी मेरी। एकाएक जो चेहरा प्रकट हुआ। जहाँ तक तेज की बात है फतेहपुर शेखावटी में मंदिर में पूजा के दौरान एक पापा-मम्मी की फोटो जिसमें पापा एक मलमल टाइप का कुर्ता पहने थे, उस फोटो में पापा के चेहरे पर तेज देखने लायक था, उससे तुलना की जा सकती है। काफी अच्छा लगा था। बाद में मैंने इस स्वप्न की चर्चा मम्मी से भी की। लेकिन बोलने के वक्त मैं इतना स्पष्ट नहीं हो पाता था। पापा जी सपने में लगातार आ रहे थे-ऐसी बात तो कर ही लेता लेकिन स्पष्ट रूप से स्थिति की ओर संकेत नहीं कर पाता। अभी उस तेज की इतनी कमी महसूस हो रही है कि कुछ नहीं चल पा रहा है। पापा की तेजी - सभी मायनों में तेज के साथ खल रही थी।
Friday, February 12, 2010
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