Thursday, February 11, 2010

एक Lacuna सा create हो गया..

एकाएक मानो जिंदगी थम सी गयी। कुछ करने की चाह ने ही एक गति प्रदान की। दिल्ली में कर रहा पाठ्यक्रम अपने अंतिम चरण में था। फाइनल एक्जाम होने वाला था.. पिछला परफार्मेंस अच्छा था अतः इस बार भी काफी अच्छा ही होने की उम्मीद थी अतः मेहनत करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना था। लेकिन लौटने के बाद मई महीने में काफी खालीपन-सा महसूस हुआ। वैसे ही इंस्टीच्यूट में भी क्लासेज मई भर अल्टर वे में हुई। मई के अंतिम चार दिन एग्जामस थे, सो उसकी ही तैयारी ही चलती रही। लगे रहे... एक अच्छे परिणाम पाने की चाह में। पढ़ाई के दौरान पिताजी का ध्यान आना.. काफी देर तक किसी और सोच में डूब जाना.. निश्चय ही परीक्षा के समय सही नहीं था। लेकिन इस Lacuna को खत्म करना मेरे वश की बात नहीं । किसी अपने को खोने का दर्द क्या होता है... यह जिस पर बीतती है वहीं जान सकता है। सही बात है आब महसूस हो रहा है और होता रहेगा.. ये घाव कभी नही भरने वाला।

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