Wednesday, March 10, 2010

चाँद के लिए नयी सवारी

( फीचर के रूप में साइंस राइटिंग वर्कशॉप , जामिया मिल्लिया इसलामिया, सितम्बर 2006 के लिए लिखा गया वैज्ञानिक फीचर।)

आकाश में पंछी को उड़ता देख मानव ने कल्पना की- क्या हम भी उड़ सकते है? तो, इसका जवाब राइट बंधुओं ने हवाई जहाज बनाकर दिया। फिर तो मानव अंतरिक्ष में गया, चाँद पर पहुँचा और अब उससे भी आगे जाने की तैयारी में है। इसके लिए अमेरिकी अंतरिक्ष संस्थान नासा ने अंतरिक्ष में तथा चाँद पर जाने के लिए एक नयी सवारी बनाने का फैसला किया है। वह नयी सवारी है- ओरिऑन अंतरिक्ष यान


आज से सैंतीस साल पहले जब मानव ने पहली बार चाँद पर पहुँचा, तो उसे नन्हे कदम की संज्ञा दी गयी। तब से लेकर आज तक हम अगला कदम बढ़ाने की तैयारी में जुटे है। मंगल पर जाने की सोच रहे है। उसके लिए हाल में ही नासा ने अत्याधुनिक तकनीक से युक्त एक नया अंतरिक्ष यान बनाने की घोषणा की है। जो कि पिछले यान अपोलो से ज्यादा विकसित होगा। नये अंतरिक्ष यान का नाम ओरिऑन रखा गया है जो कि काफी सोच विचार कर रखा गया है। जिस प्रकार पहले यान अपोलो का संबंध यूनान की पौराणिक कथा से है। इसी प्रकार ओरिऑन का नाम रात में आकाश में चमकने वाले नक्षत्र मंडल ओरिऑन से लिया गया है। इससे पहले साठ के दशक में भी नासा ने इस नाम का उपयोग नाभिकीय अंतरिक्ष यान के संदर्भ में किया था। इस नक्षत्र मंडल के काफी तारे दिशा बताने के लिए उपयोग किये जाते है जिससे कि खोजकर्ता हमें एक नयी दुनिया में ले जाते है।

ओरिऑन अपनी पहली उड़ान 2014 ईंस्वी में करेगा। जिससे अंतरिक्ष यात्री सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक ही जा सकते है। फिर इसके बाद 2020 ईंस्वी तक ओरिऑन द्वारा चाँद पर जाने की योजना है। इसके बाद ही मंगल या दूसरे ग्रहों की तरफ कदम बढ़ाने की बात सोची जा सकती है। तब हमें इस सौर-मंडल के अन्य ग्रहों की नयी दुनिया का पता चल सकेगा।

जून महीने में नासा ने इस कार्यक्रम के तहत विकसित होने वाले प्रक्षेपित यानों यानि लांच वेहकिल का नाम एरिस रखा गया है, जो कि मंगल का दूसरा नाम है। इसे प्रक्षेपित करने वाले बूस्टर का नाम एरिस 1 रखा गया है। एक बड़े भारी प्रक्षेपित हिस्से को एरिस 5 के नाम से जाना जाएगा।

नयी सवारी यानि कि नयी गाड़ी सुनते ही दिमाग में आता है कि जरूर इसमें नयी खूबियाँ भी होंगी। अब एक कार की बात करें, तो लोग कार में ज्यादा से ज्यादा सीट चाहते है और जगह भी। यह खूबियाँ ओरिऑन में भी है। यह अब ज्यादा से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों को ले जा सकेगा और साथ ही साथ काफी सारा सामान भी। इससे चाँद और मंगल पर जाने में मदद मिलेगी। ओरिऑन का आकार पुराने अंतरिक्ष यानों के समान ही होगा, लेकिन इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। इसका आकार अमेरिका और रूस में उपयोग होने वाले शंक्वाकार अंतरिक्ष यानों की ही भाँति होगा, लेकिन टाइल्स नहीं होंगे। जबकि पुराने ऊष्मारोधी कवच यानि हीट शील्डस और पैराशूटस का उपयोग किया जाएगा।

अभी हाल में ही नासा ने काफी सारी जाँचों को किया है, जिससे कि ओरिऑन अंतरिक्ष यान की डिजाइन को और अच्छा बनाने में मदद मिलेगी। इन जाँचों में मुख्य रूप से पैराशूट का समय पर खुलना आता है। इसके लिए नासा के इंजीनियरों ने अमेरिकी थल सेना के प्रशिक्षण केंद्र पर दो पैराशूट की जाँच की। जाँच के आँकड़ों को संग्रह कर प्रक्षेपास्त्र के प्रथम चरण को विकसित करने में मदद मिलेगी। पैराशूट 8,000 फीट की ऊँचाई से गिराकर जाँच की गई है और यह जाँच 2008 ईंस्वी तक लगातार चलती रहेगी।

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