Monday, March 15, 2010

JNU भ्रमण

( भारतीय जनसंचार संस्थान(IIMC) नई दिल्ली में एक सप्ताह की रेडियो ट्रेनिंग के तहत हमें एक रेडियो-प्ले करना था, इसके लिए योगेश ने वहाँ के कम्युनिटी रेडियो "अपना एफएएम" 96.9 के लिए एक शानदार नाटक लिखा। इसकी रिकॉर्डिंग भी की बाद में ऑन-एयर भी हुआ। स्क्रिप्टिंग ग्रुप के तीन सदस्यों को ध्यान में रखकर लिखी गयी थी - योगेश, नितेश और नेहा । लेकिन रिकॉर्डिंग के दिन नेहा ना आ सकी तो हमें नमता गुप्ता से उसके अंश पढ़वाने पड़े। इस नाटक में एक आवाज और भी शामिल की गयी थी- दीपेंद्र की ढ़ाबा मालिक के रूप में.....) ( जून २००७ में ट्रेनिंग की थी )

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Title: JNU भ्रमण

Synopsis: दो भाई, नितेश और योगेश, दिल्ली पहुँचते है। योगेश जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पढ़ता है और अपने छोटे भाई नितेश को JNU की सैर कराने के लिए दिल्ली लेकर आता है... JNU के बारे में जानकर नितेश भी निश्चय करता है वो भी JNU में पढ़कर अपनी शिक्षा पूरी करेगा।

Script: (Sound of train and crowd at the station)

Yogesh: लो पहुँच गये हम दिल्ली...

Nitesh: योगेश भैया..... अब यहाँ से JNU कितनी दूर है?

Yogesh: अरे तुम इतने उतावले क्यों हो रहे हो? बहुत जल्द हम JNU में होंगे..... आओ....
(Sound of Buses)

Yogesh: नितेश.... ये है मिन्टो रोड.... यहाँ से हम 615 नंबर की बस पर बैठेंगे जो हमें सीधे JNU ले जायेगी।
Nitesh: भैया.... वो रही 615 नंबर की बस

Yogesh: हाँ....... वही है..... चलो
(Bus leaves....)

Yogesh: अच्छा सुनो..... मैं जरा थक गया हूँ...... थोड़ा सो लेता हूँ जब JNU आ जाए तब मुझे जगा देना। Nitesh: ठीक है भैया.... तब तक मैं दिल्ली देखता हूँ..... पर भैया.... जब JNU आएगा तो मुझे कैसे पता चलेगा? मैंने तो कभी JNU देखा ही नहीं है।Yogesh: हा...हा....हा..... इसकी फिक्र तुम मत करो...... तुम्हें पता चल जाएगा।
(Sound of Bus with some music)
(Aeroplane की आवाज)
Nitesh: भैया(चौंककर).... ये कैसी आवाज है?

Yogesh: अरे..... आ गया JNU..... ये plane की आवाज थी... यही है JNU आने की पहचान...
Nitesh: ये Aeroplane?Yogesh: हाँ..... चलो तैयार हो जाओ..... अगले stop पर हमें उतरना है......

Nitesh( खुशी से) जी भैया.....
(Bus रूकने की आवाज)

Yogesh: चलो......

Nitesh: ये Hostel है क्या भैया?

Yogesh: हाँ....... ये Ganga Hostel है, girls hostel.... और उस तरफ Jhelum Hostel है और वहाँ Satluj Hostel....Nitesh: आप Satluj Hostel में रहते हो न?

Yogesh: हाँ.... और ये सामने Ganga dhaba.....

Nitesh: Oh..... यही है ganga dhaba....जिसके बारे में आप इतना कुछ बताते रहते है.......Yogesh: हाँ...... ये वही Ganga dhaba है।

Nitesh: पर ये तो बहुत Normal सा dhaba है?Yogesh: यही तो खासयित है इस ढ़ाबे की.... कि इतने सालों बाद भी ये Normal है...... वरना आज की तेज जिन्दगी में Normal रहना बड़ा मुश्किल होता है..... खैर....चलो पहले ढ़ाबे पर चाय पीते है उसके बाद रूम पर चलेंगे...

Nitesh: ठीक है भैया...

(Sound of people)

Yogesh: दो चाय देना भैया...

Dhaba man: 5 रूपये खुले दो......

Music...

Yogesh: ये लो..... यहाँ की स्पेशल चाय

Nitesh: हाँ... वाकई बहुत अच्छी चाय है.... भैया.... यहाँ और भी तो ढ़ाबे होंगे?Yogesh: हाँ..... लगभग हर 200 मीटर की दूरी पर एक ढ़ाबा है।

Nitesh: और यहाँ Hostel कितने है?

Yogesh: यहाँ 16 hostels है जिनमें 3 Girls hostel है 7 boys hostel, 4 co-hostel और 1 Married Hostel....

Nitesh: Co-Hostel?

Yogesh: हाँ...... आधे में Boys रहते है और आधे में Girls ...

Nitesh: अच्छा... ये बताइए भैया.... यहाँ सारे Hostels का नाम नदियों के नाम पर क्यों है?

Yogesh: वो इसलिए क्योंकि नदियाँ हमारे देश की एकता और अखण्डता को दर्शाती है.... और यहाँ तो अपने देश के हर कोने से लोग आते है.... जब वो अपने शहर से गुजरने वाली नदी का नाम यहाँ देखते है तो उन्हें बहुत अपनापन सा महसूस होता है।
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Neha: Hi Yogesh!

Yogesh: Hi !
Neha: तुम घर से कब आए?

Yogesh: बस अभी 5 मिनट पहले ही उतरा हूँ बस से.... अरे हाँ.... ये मेरा छोटा भाई..... नितेश, नितेश ये है नेहा.... यहाँ Political Science से MA कर रही है....Neha: हेल्लो

Nitesh: नमस्ते !

Yogesh: नेहा ..पढ़ाई के साथ थियेटर भी करती है... बहुत अच्छा गाना गाती है और क्रांतिकारी खयालात की है।

Neha: अरे बस-बस.... ये क्या बता रहे हो उसे

Yogesh: दरअसल अगली साल ये भी यहाँ एडमिशन लेना चाह रहा है। तो यहाँ की आबो-हवा से रूबरू कराना जरूरी है।

Neha: हाँ... तब तो बताना जरूरी है

Yogesh: वैसे तुम क्या कर रही थी?

Neha: मैं ये Posters लगा रही थी... आज रात Procession है... वो Nandigram में जो हुआ न..... उसके लिए

Yogesh: अरे हाँ.... बहुत बुरा हुआ॥


Nitesh: नेहा दीदी आप कुछ बताइए यहाँ के बारे में....

Neha: पहले मैं Posters चिपका कर आती हूँ..... फिर इत्मिनान से बैठकर तुम लोगों से बात करती हूँ।

Nitesh: ठीक है... (to Yogesh) भैया...... Nandigram में जो हुआ उसका Protest यहाँ करने से क्या होगा?

Nitesh: दरअसल यही तो lifeline है JNU की.... जब भी देश में कुछ ऐसा घटता है जो इंसानियत के खिलाफ हो तो हम उस पर अपना Protest जरूर दर्ज कराते है। एक तरह से देखा जाए तो ऐसा करने से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.... पर इतना जरूर है हमारे मन को थोड़ी शांति मिलती है और यहाँ रहने वाले अंजान लोगों को और इस देश के नेताओं को इस बात का आभास हो जाता है कि जो कुछ हुआ वो गलत हुआ।

Nitesh: ह्म्म्म

Yogesh: हम अपने freedom of speech and expression का पूरा इस्तेमाल करते है।

Nitesh: शायद इसी लिए लोग JNU को intellectuals का गढ़ कहते है।

Yogesh: हाँ..... लोगों को बहुत भरोसा है इस जगह पर..... पता है जब 1984 में दंगे हुए थे तब सिखों ने Police Station के बजाए JNU आकर शरण ली थी।

Nitesh:अच्छाYogesh: हाँ.... और 75 में जब Indira Gandhi ने emergency लगायी थी और सारे देश का कामकाज ठप्प हो गया था तब उसके Protest में एक दिन का Administrative work खुद किया था.....

Neha: चलो.... लग गए

Yogesh: अब जो पूछना है.... नेहा से पूछो

Nitesh: नेहा दीदी.... आप इतने सारे काम करती है.... आप थक नहीं जाती

Neha: ऐसा कुछ नहीं है..... दरअसल मैं जो कुछ करती हूँ दिल से करती हूँ ..... और दिल से किये गए काम में थकान नहीं होती।

Nitesh: और आप theatre के लिए कब Time निकालती है?

Neha: Theatre का rehearsal मैं शाम को करती हूँ..... यहाँ पर 4 theatre group है...... Bahroop,IPTA,Jugnu और Dastak... मैं Bahroop के साथ काम करती हूँ।

Nitesh: अपना नाटक कब दिखाएंगी आप ?

Neha: जरूर दिखाऊँगी.... एक बार यहाँ आ तो जाओ।

Yogesh:अरे इसे तुम कोई Revolutionary song ही सुना दो....

Nitesh: हाँ हाँ दीदी.....

Neha: अरे तुम्हारे भैया भी तो खूब गाने गाते है......

Yogesh: अच्छा ठीक है मिलकर गाते है....

Neha: ठीक है.... चलो... वो गाते है॥ ले मशालें...

ले मशालें चल पड़े है लोग मेरे गाँव के

अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के

पूछती है झोपड़ी और पूछते है खेत भी

कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के....

ले मशाले.....

Nitesh: वाह मजा आ गया....

Yogesh: अच्छा अब काफी देर हो गई है.... नेहा को जाने दो..... अब हम Hostel चलते है...

Nitesh: ठीक है....


( Music...)
Nitesh: भैया हम डिनर कहाँ करेंगे?

Yogesh: Mess .....

Nitesh: मैं आपके साथ mess में खा सकता हूँ?

Yogesh: हाँ क्यों नहीं... बस एक गेस्ट कूपन लेना पड़ेगा ...

( Music...)
Nitesh: भैया अब तो मुझे नींद आ रही है....

Yogesh: इतनी जल्दी.... यहाँ तो लोग 12 बजे के बाद सोते है ...

Nitesh: घर की आदत है ना...Yogesh: ठीक है सो जाओ ...
(Aeroplane की आवाज.)

The End

Yogesh Kumar
J-29
RTVJ


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