नए साल में भी खबरों का उसी तरह आना जारी है। पिछले सितंबर माह में एयर इंडिया के बेड़े में ड्रीमलाइनर विमान शामिल हुआ तो काफी मीडिया में छाया रहा। यह भारतीय वायुसेवा में शामिल पहला ड्रीमलाइनर विमान था। आज तक इनकी संख्या बढ़कर छह हो गई है जिसमें तीन विमान घरेलू और तीन अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रयोग किए जा रहे है, उन्हें आज से सेवा में नहीं लिया जा रहा है। इसी तरह विश्व की अलग- अलग एयरलाइनों के अधीन उड़ने वाले 50 ड्रीमलाइनर विमानों को अंतर्राष्ट्रीय उड्डयन नियामक संस्था के आदेश पर भूमि पर उतार दिया गया है। यह सब कल (16 जनवरी) जापान की ऑल निप्पन एय़रलाइंस के ड्रीमलाइनर विमान में कॉकपिट में लगी बैट्री की खराबी के कारण औऱ धुंए के अलर्ट के संकेत आने पर उस विमान को मध्य रास्ते में एक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी। इसके साथ ही जापान की ऑल निप्पॉन एयरलाइंस और जापान एयरलाइंस ने अपने बेड़े के 24 ड्रीमलाइनर विमानों को ग्राउंड कर दिया। इसी प्रकार की कई गड़बड़ी के कारण अमेरिका ने पिछले सप्ताह और भारत ने भी दिसंबर माह में विमान को एक दिन के परीक्षण के बाद फिर से सेवा में लगाया था। बोइंग की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत ड्रीमलाइनर विमानों का निर्माण तीव्र गति से किया जा रहा है जिस कारण से गुणवत्ता में कहीं ना कहीं कोई चूक रह जाती है। भारत ने ही अब तक 27 विमानों का ऑर्डर दे रखा था, जिसमें से 6 मिले। साथ ही बोइंग को इस सेगमेंट में एयरबस की ए-380 विमान से चुनौती मिल रही है। बोइंग को अगर बाजार में अपनी साख को बनाए रखना है और आगे जिन ड्रीमलाइनर विमानों की डिलेवरी करनी है, उसमें गुणवत्ता परीक्षण पर ध्यान दे और पुराने विमानों की खामियों को जल्द दूर करने का प्रयास करे नहीं तो नये साल में गलत कारणों से खबरों में रहना- उसके लिए ठीक नहीं है। (2221)
Wednesday, January 22, 2014
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