Wednesday, January 22, 2014

2 मार्च 2013

भारतीय गणराज्य के सालाना आय-व्यय का ब्यौरा यानि बजट को दो दिन पहले यानि 28 फरवरी को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने लोकसभा में पेश किया। पिछले साल की तरह इस साल भी बजट क्वारनटाइन में बजट की कॉपी सवा आठ बजे तक हमें अग्रिम में मिल गई, लेकिन वैसा आउटपुट नहीं दे पाये जैसा देना चाहिए था। फिर भी काम की तारीफ हुई।  बजट में इस बार अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए किसी तरह के पॉपुलिस्ट बजट की यानि लोक-लुभावन वायदों की किसी झड़ी को लगाने से चिदंबरम ने साफ इंकार कर दिया। वित्तीय अनुशासन पर जोर देने की बात स्पष्ट रूप से दिखाई दी। भारत अभी विकास दर के उस स्तर को हासिल करने की सोच रहा है जो कि अभी दिवा-स्वप्न की भांति है। 5 प्रतिशत के आंकड़े के इर्द-गिर्द घूमता विकास-दर, राजस्व घाटे को कुल सकल घरेलू उत्पाद का 4.8 प्रतिशत तक लाने का बजट अनुमान- ये सब एक तरीके से किसी नट की तरह रस्सी पर चलने का काम करने के समान है। इसमें वित्त मंत्री ने काफी समझदारी दिखाई। सब्सिडी बिल को कम करना- भले ही महंगाई के रूप में आम जनता के सामने आ रहा है, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विश्व की बड़ी- बड़ी रेटिंग एजेंसियों ने भारत का आर्थिक परिदृश्य को जस-का-तस रखा है, इसे जंक स्टेट के दर्जे में नहीं डाला। इससे जहां निवेशकों को उत्साह बढ़ेगा, वहीं रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स वाले मामले में स्पष्टता का अभाव विदेशी निवेशकों को कहीं-ना-कहीं निवेश करने से रोकेगा। अभी की स्थिति में वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया है, वह वाकई एक अच्छा बजट है। इससे पहले भी रेल बजट में आम जनता को किराया ना बढ़ाने का एक छद्म राहत दी गई। छद्म तरीके से अन्य भाड़े बढ़ाए गए, जिसका बाद में पता चलेगा। आम बजट कमरतोड़ महंगाई को लाने में सहयोगी होगा, लेकिन अभी की यह जरूरत भी है। (2221)

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