बाहर बारिश हो रही है। मौसम में ये तब्दीली पिछले दो दिनों से है। आज सुबह के समय अभी आसमान में घने काले बादल छाये हुए है। बारिश लगता है आज थमेगी नहीं। कल ही कवरेज टीम के साथ भारतीय मौसम विभाग जाना हुआ। लोदी रोड स्थित मौसम विभाग के भवन में आँख-मिचौली करते, कभी खुशगवार, कभी थोड़ा दिक्कत देने वाला मौसम क्यूं हो रहा है- इसका कारण जानने पहुंचे। मुख्य बिल्डिंग में पूरे देश के मौसम का पूर्वानुमान किया जाता है, वहीं रिजनल मेट्रोलॉजिकल सेंटर में उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों का पूर्वानुमान किया जाता है। अभी हाल के मौसम में बदलाव पश्चिम विक्षोभ के कारण हुआ है। कैस्पियन सागर, भू-मध्यसागर, अरब सागर के ऊपर कई बदलाव का असर अब जाकर हमें देखने को मिल रहा है। टेलीविजन चैनल के लिए बाइट देने से पहले दो अधिकारियों बिशन सिंह और एम. दुरईस्वामी सर ने दस-पंद्रह मिनट तक तीन सिस्टम पर तरह-तरह के भारतीय मानचित्र के ग्राफिक्स पर तरह-तरह के चिह्न, रेखाएं इत्यादि को देखकर मौसम का अध्ययन किया, फिर एएनआई और हमारे चैनल को साथ में बाइट दिया। एएनआई वालों ने तो उसका सीधा प्रसारण कर डाला एक 3-जी डिब्बे की मदद से। तकनीक के बारे में सुन रखा था लेकिन देखने का मौका पहली बार मिला। काफी अच्छा अनुभव रहा। यह मेरे पैकेजिंग की ड्यूटी के बीच में करना पड़ा। वैसे मौसम विभाग जाने का उद्देश्य दूसरा भी था। लेकिन उससे संबंधित काम ना हो सका। मौसम विभाग में उपयोग में लाया जाने वाला सिस्टम 206 करोड़ का था, जिसे फ्रांस से मंगाया गया था, लेकिन सरकारी सिस्टम की मार झेलने का दर्द यहां के अधिकारी ने बताया। सरकारी महकमें में फाइल चलने की गति के कारण जिस सिस्टम को लाने की बात होती है, उसके आने तक वह आउटडेटेड और आधी कीमत का हो जाता है। नया सिस्टम उससे ज्यादा उपयोगी होता है और इस तरह हम नए सिस्टम का फायदा उठा नहीं पाते। (0810)
Wednesday, January 22, 2014
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