विश्व टी20 के लिए
बांग्लादेश के स्टेडियम सज गए है। क्वालीफाइंग दौर के मुकाबले चल रहे है। छोटी
टीमें मुख्य दौर में आने की जुगत में है। यहीं बांग्लादेश में हाल में एशिया कप के
मुकाबले हुए, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हुआ और पाकिस्तान ने रोमांचक
जीत हासिल की थी, लेकिन ये जीत कुछ और कारणों से भारतीय मीडिया के सुर्खियों में
छाई रही। विश्व टी20 में फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे, कोई एक टीम
जीतेगी। अगर भारत जीता- तो सुर्खियां होंगी- भारत ने पाक से एशिया कप की हार का
बदला लिया। अगर पाकिस्तान जीता तो फिर क्या मेरठ के एक विश्वविद्यालय – स्वामी
विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय- के वे छात्र उन कश्मीरी छात्रों पर अपनी भड़ास
निकाल सकेंगे, जिन्होंने पिछले मुकाबले में हार के बाद- उन कश्मीरी छात्रों को
हॉस्टल से बाहर निकलवा दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक तरफ जहां भारत की
किरकिरी करवाई, वहीं स्थानीय प्रशासन ने देशद्रोह का आरोप पहले लगाकर, फिर वापस
लेकर- अपनी भद ही पिटवाई। उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री को इस
सिलसिले में बात करनी पड़ी। अब लोगों को समझना चाहिए कि वे अस्सी के दशक में नहीं
जी रहे। ये 2014 का भारत है। सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक तौर पर हम पिछले दशकों से
काफी आगे बढ़ गए है। क्रिकेट की ही बात करे, तो फुटबॉल की तरह ‘क्लब-संस्कृति ‘ आने के साथ क्रिकेट भी अपने आप को
इवॉल्व कर रहा है। देश पीछे छूट रहा है। यहां तक की एशिया कप में भारत की कप्तानी
कर रहे विराट कोहली को अपने देश में आईपीएल के मैच में आउट होने पर स्टेडियम में
सन्नाटा नहीं, बल्कि दर्शकों की तालियां सुनने को मिलती है, जिसे वे हजम नहीं कर
पाते है। दर्शक तो खेल आनंद उठाने के नजरिए से देखता है। वो किसी भी टीम को सपोर्ट
कर सकता है, अपनी टीम की जीत पर खुशी मना सकता है। मेरठ में हुई घटना- भारत की
सच्ची तस्वीर नहीं पेश करता। लोगों को अपने जेहन में एक बात हमेशा रखनी चाहिए- “खेल को खेल की तरह लो।“ (2011)
Monday, March 17, 2014
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment