Thursday, January 5, 2017

17 अक्टूबर 2001

प्रिय दैनन्दिनी,
                     आज से नवरात्रा प्रारंभ है। आज से नौंवे दिन तक मां दुर्गा की विशाल पूजा व अराधना की जाएगी। फिर दसवें दिन विजयादशमी का त्योहार है। वैसे दिन की शुरूआत सामान्य दिनों की ही भांति हुई। बस पूजा-पाठ के कार्यक्रम में थोड़ी सी अभिवृद्धि करनी पड़ी। उसके पश्चात नाश्ता फिर नौ पांच वाली बस आज पकड़ा गई। विश्वविद्यालय पहुंचे। प्रथम दो क्लासेज मोनिका जुनेजाजी की थी, वो अनुपस्थित थी। अतः उस समय पाठ्यक्रम संबंधी बातों पर कुछ मित्रों से विचार-विमर्श हुआ। कुछ पाठ्यसामग्री की फोटोकॉपी भी करवायी। फिर साढ़े ग्यारह बजे वाली क्लास नज़फ हैदर सर की थी। अस्सी-नब्बे मिनट के लेक्चर को सुनने के बाद पौने दो तक घर वापसी हुई। भोजनोपरांत आराम करने के विचार से गए। पांच बजे तक सोना हो गया। उठने के बाद थोड़ी क्रिकेट फिर सात से नौ पढ़ाई। फिर भोजन। फिर लेखन। आज पूर्व दिनों जैसी स्थिति नहीं है क्योंकि इससे पहले जब भी मैं लेखन कार्य हेतु आता तो आंखे बोझिल होती या कुछ देर बाद निश्चित रूप से सोना होता लेकिन आज तो ऐसी स्थिति है कि इसके पश्चात भी कुछ कार्य किया जा सकता है। बात करें आज थोड़ी विश्वविद्यालीय पढ़ाई की। पढ़ाई तो एकदम फर्स्ट क्लास हो रही है, लेकिन बहुत सारे छात्रों के साथ समस्या, पाठ्यक्रम, परीक्षा संबंधी तथ्यों की अनभिज्ञता है। अभी तक सत्तर प्रतिशत छात्रों की स्थिति एवरेज वाली है। मैं भी उसी में से हूं। एक वाइड और एक्सटेंसिव स्टडी की जरूरत है। यहां आकर लगता है हमनें शून्य को भी एचीव नहीं किया। आपको- शुभ रात्रि। मैं कुछ करने के मूड में है... अच्छा अलविदा।
- नितेश

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