प्रिय दैनन्दिनी,
आज अचानक सवा चार में उठना हो गया। शौच व मंजन के पश्चात अलसायी हुई शारीरिक स्थिति के कारण आधा घंटा और लेटना पड़ा। पौने छह तक शाखा रवानगी हुई। आज योग के कुछ चरणों को सीखे। पुनः वही कार्यक्रम करते हुए पौने नौ में विश्वविद्यालय गये, पहले दो कलांश वाले आचार्य की अनुपस्थिति के कारण महेश से मिलने गये फिर साढ़े ग्यारह बजे वाला कालांश करने के पश्चात डेढ़ बजे तक लौटे। जल्दी से खाकर दो-दस तक पुनः विश्वविद्यालय जाना पड़ा क्योंकि स्नातकोत्तर पूर्वार्ध वालों के लिए उत्तरार्ध वालोंं ने एक पार्टी का आयोजन किया। पूर्वार्ध के छात्रों की संख्या पंद्रह के करीब थी और उनकी साठ के करीब। परिचय, सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात छह बजे तक घर वापस लौटना पड़ा। फिर नेहरू विहार में दो मित्रों से मिलने के लिए गये लेकिन दोनों से भेंट नहीं हुई। वापसी सात बजे हुई। सात से नौ का समय शारीरिक थकावट के कारण बिछावन पर लेटे लेटे बीता। हां... एक बात और यहां कलकता वाले मित्र सतीश का वापस लौटना हुआ। नौ बजे तुमसे सारी व्यथा कहने के लिए बैठा हूं। अब इसके पश्चात भोजने करने के बाद नींद के आगोश में चला जाउंगा क्योंकि कल सुबह एक अत्यावश्यक कार्यक्रम के कारण निकलना पड़ सकता है। क्षमा करना... पठन-पाठन से संबंधित गतिविधियां आज दूसरे दिन भी ठप्प रही। अब जल्द ही एक वास्तविक कदम उस दिशा में उठाना होगा। शेष शुभ।
- नितेश
No comments:
Post a Comment