प्रिय दैनन्दिनी,
आज थोड़ा-सा सुधार सभी क्षेत्रों में मैंने महसूस किया, जो कि एक सराहनीय स्थिति है। साढ़े छह में प्रातः उठने के बाद शौच व मंजन का कार्य करके पौने सात तक शाखा पहुंचा व पूर्व के कार्यक्रम करते हुए साढ़े सात तक घर पहुंचा। आठ बजे 'समाचार प्रभात' सुनकर एक समाचार का खंडन हुआ। स्नान व नाश्ते के बाद साढ़े ग्यारह से दो बजे तक रूक-रूक कर पढ़ाई का कार्यक्रम चला फिर भोजन करने के पश्चात भी पढ़ाई चली। फिर चार बीस के लगभग एक मित्र के साथ केंद्रीय भंडार गया जहां से कुछ सामग्री लेकर आया रसोई घऱ के लिए। फिर द मेकिंग ऑफ हलवा कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ। फिर कुछ हंसी-मजाक के बाद आठ बजे से नौ बजे तक पढ़ने का कार्य हुआ। नौ से दस बजे तक शवासन की मुद्रा में था अर्थात् निद्रा ने जकड़ लिया। मित्रों द्वारा उठाने के पश्चात भोजन व तुमसे बात करने का मौका मिला, अब मैं दस मिनट बाद पुनः नींद के आगोश में चला जाऊंगा। आज तुम्हें जो पहली बात मैंने तुमसे कहीं उसका तात्पर्य यह है कि आज पढ़ाई के कार्यक्रम ने विस्तार पाया, दिन भर निद्रा जैसी स्थिति को टाला गया क्योंकि रात्रि में फिर सोने में समस्या आती है। स्थिति में अब भी सुधार की आवश्यकता है और मनुष्य हमेशा अच्छी स्थिति की ओर जाना चाहता है क्योंकि जिस स्थिति में वह है उससे भी अच्छे की संभावना निश्चय ही होती है। यूं ही इस दिशा में प्रयासरत रहना पड़ेगा कि एक अच्छी स्थिति को प्राप्त कर सकूं। ऐसी आशा, अभिलाषा व इच्छा की पूर्ति में तुम भी सहयोगी बनो। कुशल रात्रि।
- नितेश
आज थोड़ा-सा सुधार सभी क्षेत्रों में मैंने महसूस किया, जो कि एक सराहनीय स्थिति है। साढ़े छह में प्रातः उठने के बाद शौच व मंजन का कार्य करके पौने सात तक शाखा पहुंचा व पूर्व के कार्यक्रम करते हुए साढ़े सात तक घर पहुंचा। आठ बजे 'समाचार प्रभात' सुनकर एक समाचार का खंडन हुआ। स्नान व नाश्ते के बाद साढ़े ग्यारह से दो बजे तक रूक-रूक कर पढ़ाई का कार्यक्रम चला फिर भोजन करने के पश्चात भी पढ़ाई चली। फिर चार बीस के लगभग एक मित्र के साथ केंद्रीय भंडार गया जहां से कुछ सामग्री लेकर आया रसोई घऱ के लिए। फिर द मेकिंग ऑफ हलवा कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ। फिर कुछ हंसी-मजाक के बाद आठ बजे से नौ बजे तक पढ़ने का कार्य हुआ। नौ से दस बजे तक शवासन की मुद्रा में था अर्थात् निद्रा ने जकड़ लिया। मित्रों द्वारा उठाने के पश्चात भोजन व तुमसे बात करने का मौका मिला, अब मैं दस मिनट बाद पुनः नींद के आगोश में चला जाऊंगा। आज तुम्हें जो पहली बात मैंने तुमसे कहीं उसका तात्पर्य यह है कि आज पढ़ाई के कार्यक्रम ने विस्तार पाया, दिन भर निद्रा जैसी स्थिति को टाला गया क्योंकि रात्रि में फिर सोने में समस्या आती है। स्थिति में अब भी सुधार की आवश्यकता है और मनुष्य हमेशा अच्छी स्थिति की ओर जाना चाहता है क्योंकि जिस स्थिति में वह है उससे भी अच्छे की संभावना निश्चय ही होती है। यूं ही इस दिशा में प्रयासरत रहना पड़ेगा कि एक अच्छी स्थिति को प्राप्त कर सकूं। ऐसी आशा, अभिलाषा व इच्छा की पूर्ति में तुम भी सहयोगी बनो। कुशल रात्रि।
- नितेश
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