प्रिय दैनन्दिनी,
क्या करें, क्या न करें ये कैसी मुश्किल हाय- निश्चय ही इस गीत को गीतकार ने एक दुविधा वाली स्थिति में लिखा होगा, लेकिन आज हमलोगों के जीवन में अधिकांशतः लोग इसी समस्या से ग्रस्त है। एक योजना के तहत काम न करने वालों का क्या हश्र होता है- इसका परिणाम हम विभिन्न अवसरों पर देख सकते हैं। वैसे लगता है इस स्थिति के करीब पहुंच रहा हूं... नहीं... नहीं... नहीं यार ऐसा नहीं होने देना है। प्रातःकाल के कार्यक्रम यथानुरूप चले। आज कॉलेज गया जहां एक्जामिनेशन फॉर्म को जमा करा दिया, फिर आई-कार्ड व गन्नौर संबंधित जानकारी (बस अड्डे से) लेते हुए घर लौटे। पांच बजे भोजन व छह के बाद गोल गट्टा में लगा फट्टा तरातर मार प्रतियोगिता का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण लगभग दो घंटे देखा। फिर नीचे आकर भोजन बनाने का उपक्रम हुआ। भोजन के पश्चात उपस्थित हुआ तुम्हारे समक्ष। अगर पूरे दिन का मूल्यांकन करे तो कोई मूल्य न निकला और इस दिन का अंकन भी बाकी पिछले दिनों की तरह हो गया। आज नंदूजी रात्रि का भोजन बनाने आये। ये महोदय हमारे कुक है। यह जिस वक्त आये उस वक्त मैं एक काम में व्यस्त था तभी हमारे एक मित्र उनकी व्यथा सुनकर उनको अवकाश दे चुके थे, लेकिन मेरे हस्तक्षेप के पश्चात कुक महोदय रसोईघर में रोटी बनाने में जुट गये लेकिन हम अपने उस मित्र से तेजी में बात करने लगे, जिसका मुझे काफी दुख हुआ। मैं बात करने के क्रम में अनियंत्रित हो गया अर्थात् आवाज ऊंची हो गयी, थोड़ी देर बाद सब सामान्य हो गया। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, मैं इस बात का ध्यान रखूंगा। काफी रात हो चुकी है अतः.... शुभ रात्रि।
- नितेश
क्या करें, क्या न करें ये कैसी मुश्किल हाय- निश्चय ही इस गीत को गीतकार ने एक दुविधा वाली स्थिति में लिखा होगा, लेकिन आज हमलोगों के जीवन में अधिकांशतः लोग इसी समस्या से ग्रस्त है। एक योजना के तहत काम न करने वालों का क्या हश्र होता है- इसका परिणाम हम विभिन्न अवसरों पर देख सकते हैं। वैसे लगता है इस स्थिति के करीब पहुंच रहा हूं... नहीं... नहीं... नहीं यार ऐसा नहीं होने देना है। प्रातःकाल के कार्यक्रम यथानुरूप चले। आज कॉलेज गया जहां एक्जामिनेशन फॉर्म को जमा करा दिया, फिर आई-कार्ड व गन्नौर संबंधित जानकारी (बस अड्डे से) लेते हुए घर लौटे। पांच बजे भोजन व छह के बाद गोल गट्टा में लगा फट्टा तरातर मार प्रतियोगिता का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण लगभग दो घंटे देखा। फिर नीचे आकर भोजन बनाने का उपक्रम हुआ। भोजन के पश्चात उपस्थित हुआ तुम्हारे समक्ष। अगर पूरे दिन का मूल्यांकन करे तो कोई मूल्य न निकला और इस दिन का अंकन भी बाकी पिछले दिनों की तरह हो गया। आज नंदूजी रात्रि का भोजन बनाने आये। ये महोदय हमारे कुक है। यह जिस वक्त आये उस वक्त मैं एक काम में व्यस्त था तभी हमारे एक मित्र उनकी व्यथा सुनकर उनको अवकाश दे चुके थे, लेकिन मेरे हस्तक्षेप के पश्चात कुक महोदय रसोईघर में रोटी बनाने में जुट गये लेकिन हम अपने उस मित्र से तेजी में बात करने लगे, जिसका मुझे काफी दुख हुआ। मैं बात करने के क्रम में अनियंत्रित हो गया अर्थात् आवाज ऊंची हो गयी, थोड़ी देर बाद सब सामान्य हो गया। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, मैं इस बात का ध्यान रखूंगा। काफी रात हो चुकी है अतः.... शुभ रात्रि।
- नितेश
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