Wednesday, January 4, 2017

6 अक्टूबर 2001

प्रिय दैनन्दिनी,
                    इस रविवार को अर्थात 30.09 को एक अंग्रेजी पत्र के 'स्टार फॉरकॉस्ट' में दिए गए साप्ताहिक भविष्यवाणी के अनुसार अगर मैं काम करता तो निश्चय ही यह सप्ताह मेरे लिए उपलब्धियों वाला होता मगर ऐसा नहीं हो सका लेकिन कुछ ऐसे कार्य जरूर हुए है जो सही दिशा की ओर अग्रसर करने में सहायक होंगे। जीवन की लंबी कड़ी में जुड़ी आज की कड़ी अर्थात आज का दिन भी पूर्व दिनों की भांति शुरू हुआ लेकिन दस बजे से लेकर शाम पांच बजे तक एक शून्यता। आज से सायं सात बजे से दस बजे तक पढ़ने के निर्णय को बल मिला क्योंकि पठन-पाठन का कार्य हुआ और अच्छी तरीके से हुआ। एक फ्लैट पार्टनर द्वारा उठाई गई गणितीय गुत्थी सुलझ तो न सकी लेकिन समय खूब ले लिया। रात्रि ग्यारह बजे तक भोजन फिर यहां अध्ययन कक्ष में एक संवाद तुम्हारे साथ। आज एक उत्साहपूर्वक बात हुई। मैं और मेरे एक मित्र में संवाद और सौजन्यता अच्छी लगी। इस सप्ताह के शुरू के तीन दिवसों में सुबह की बेला में जो हमने अमृत वर्षा में स्नान किया था, उस वर्षा का आनंद लेने हम कल प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से पहले उस निर्माण-स्थली पर जाना है जहां पर ऐसी वर्षा करने वाले बादलों का निर्माण होता है। कुछ यात्राएं भी करना जरूरी है क्योंकि ज्ञान के लिए यात्रा करना आवश्यक है और दिल्ली के आसपास ऐसे इलाके है जहां पर आसानी से एक दिन का कार्यक्रम बनाकर घूम फिरकर आया-जाया जा सकता है। इन्हीं कुछ बातों के साथ देता हूं अपने कलम को विराम। अ.. अ.. अ... आपको शुभ रात्रि तो कहना भूल गया... अच्छा... शुभ रात्रि।
- नितेश

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