प्रिय दैनन्दिनी,
दिन की शुरूआत उसी अंदाज में हुई। शाखा पर दो तरूण- अमितजी व कृष्णबल्लभजी से परिचय हुआ, बाद वाले मधुबनी, बिहार से थे। आज प्रातः दस बजे से पठन-पाठन के तहत अंग्रेजी के निर्धारित अभ्यासमालाओं का अभ्यास कर लिया गया। फिर एक मित्र के साथ राजीव गांधी चौक जाना पड़ा, उनका कार्य तो नहीं हुआ, लेकिन उनके कार्य के चक्कर में दस किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ गया। लौटे.. तो शाम को उसी अलसाये तरीके से बीताना पड़ा। संध्या सात बजे से आठ तक हुई पढ़ाई, फिर सब्जी खरीदाई फिर वही रात अलसायी। आजकल तुमसे जल्दी बात करने आ जाता हूं क्योंकि दस- साढ़े दस तक सोना पसंद करता हूं, अभी नींद जोर से आ रही है लेकिन भोजन का कार्यक्रम बाकी है। भोजन के पश्चात- शयनावकाश। तुम्हें देखने से लगा होगा- फिर वहीं फिजूल की बातें। निश्चय ही यह दिन भी खास उपलब्धियों वाला नहीं रहा। पढ़ाई, एम. ए. इतिहास विषय की, के दिशा में कोई कदम न उठाना मेरे लिए घातक सिद्ध हो रहा है। महाविद्यालय द्वारा परिचय-पत्र निर्गत न किए जाने से तरह-तरह की परेशानियां आ रही है। सर्वप्रथम तो बस-पास, फिर लाइब्रेरी कार्ड इत्यादि। हां, एक बात तुम्हें बता दूं- समसामयिक घटना है- कल रात विश्व के दरोगा द्वारा एक छुटभैये पर हमला हुआ। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। अब विश्व परिदृश्य में जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है या बुरा- यह तो वक्त ही बताएगा। एक मित्र ने आज अफने से संबंधित यक्ष प्रश्न रखा। स्थिति को समझ कर उत्तर देने की कोशिश कर रहा हूं और फ्लैट के पार्टनर्स के बीच भी एक तरह का शीतयुद्ध शुरू हो चुका है, उसका शमन जल्दी होगा। तुम्हें शुभ रात्रि।
- नितेश
दिन की शुरूआत उसी अंदाज में हुई। शाखा पर दो तरूण- अमितजी व कृष्णबल्लभजी से परिचय हुआ, बाद वाले मधुबनी, बिहार से थे। आज प्रातः दस बजे से पठन-पाठन के तहत अंग्रेजी के निर्धारित अभ्यासमालाओं का अभ्यास कर लिया गया। फिर एक मित्र के साथ राजीव गांधी चौक जाना पड़ा, उनका कार्य तो नहीं हुआ, लेकिन उनके कार्य के चक्कर में दस किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ गया। लौटे.. तो शाम को उसी अलसाये तरीके से बीताना पड़ा। संध्या सात बजे से आठ तक हुई पढ़ाई, फिर सब्जी खरीदाई फिर वही रात अलसायी। आजकल तुमसे जल्दी बात करने आ जाता हूं क्योंकि दस- साढ़े दस तक सोना पसंद करता हूं, अभी नींद जोर से आ रही है लेकिन भोजन का कार्यक्रम बाकी है। भोजन के पश्चात- शयनावकाश। तुम्हें देखने से लगा होगा- फिर वहीं फिजूल की बातें। निश्चय ही यह दिन भी खास उपलब्धियों वाला नहीं रहा। पढ़ाई, एम. ए. इतिहास विषय की, के दिशा में कोई कदम न उठाना मेरे लिए घातक सिद्ध हो रहा है। महाविद्यालय द्वारा परिचय-पत्र निर्गत न किए जाने से तरह-तरह की परेशानियां आ रही है। सर्वप्रथम तो बस-पास, फिर लाइब्रेरी कार्ड इत्यादि। हां, एक बात तुम्हें बता दूं- समसामयिक घटना है- कल रात विश्व के दरोगा द्वारा एक छुटभैये पर हमला हुआ। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। अब विश्व परिदृश्य में जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है या बुरा- यह तो वक्त ही बताएगा। एक मित्र ने आज अफने से संबंधित यक्ष प्रश्न रखा। स्थिति को समझ कर उत्तर देने की कोशिश कर रहा हूं और फ्लैट के पार्टनर्स के बीच भी एक तरह का शीतयुद्ध शुरू हो चुका है, उसका शमन जल्दी होगा। तुम्हें शुभ रात्रि।
- नितेश
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