Wednesday, March 11, 2026

6 मई 2021 वर्क फ्रॉम होम

 

 

 

-- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोविड-19 संबंधित स्थिति की व्यापक समीक्षा की। जिसके तहत कोविड महामारी से प्रभावित विभिन्न राज्यों और जिलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें 12 ऐसे राज्यों के बारे में जानकारी दी गई जहां 1 लाख से अधिक कोरोना के सक्रिय मामले हैं। प्रधानमंत्री को कोरोना से ज्यादा प्रभावित जिलों के बारे में जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री को राज्यों द्वारा स्वास्थ्य सुविधा को मजबूत करने के बारे में बताया गया। पीएम मोदी ने राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रमुख संकेतकों के संबंध में सहायता और मार्गदर्शन देने का निर्देश दिया।

कोरोना महामारी के त्वरित और समग्र रोकथाम के उपायों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। राज्यों को ऐसे जिलों की पहचान करने के लिए एक एडवाइजरी भेजी गई थी, जहां कोरोना मामलों की पॉजिटिविटी 10% या अधिक है और जहां ऑक्सीजन वाले या आईसीयू वाले 60% बिस्तर भरे हुए हैं। पीएम ने दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्हें रेमेडिसविर सहित दवाओं के उत्पादन में तेजी से वृद्धि के बारे में जानकारी दी गई।

प्रधानमंत्री ने अगले कुछ महीनों में टीकाकरण पर हुई प्रगति और वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने के तरीकों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री को बताया गया कि करीब 17.7 करोड़ वैक्सीन राज्यों को मुहैया कराया गया है। प्रधानमंत्री ने राज्यवार वैक्सीन के नुकसान की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री को बताया गया कि 45 वर्ष से ऊपर के करीब 31 प्रतिशत लोगो को कम से कम एक खुराक दी गई है। प्रधानमंत्री ने राज्यों से ये सुनिश्चित करने को कहा कि टीकाकरण की गति में कोई कमी नहीं आए। लॉकडाउन के बावजूद टीकाकरण के लिए नागरिकों को सुविधा दी जानी चाहिए और टीकाकरण में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों को किसी अन्य काम में नहीं लगाया जाना चाहिए। इस बैठक में राजनाथ सिंह, अमित शाह, निर्मला सीतारमण, डॉ. हर्षवर्धन, पीयूष गोयल, मनसुख मंडाविया सहित अन्य मंत्री और शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे।

(होल्ड)

< हेडर- पीएम ने कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की

 -- कोविड महामारी से प्रभावित विभिन्न राज्यों और जिलों के बारे में समीक्षा की

-- 1 लाख से अधिक मामले वाले 12 राज्यों के बारे में जानकारी दी गई

-- प्रधानमंत्री को कोरोना से ज्यादा प्रभावित जिलों के बारे में जानकारी दी गई

-- राज्यों द्वारा स्वास्थ्य सुविधा को मजबूत करने के बारे में बताया गया

-- पीएम मोदी ने राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार के निर्देश दिए

-- महामारी के त्वरित और समग्र रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई

-- राज्यों को जिलों की पहचान करने के लिए एक एडवाइजरी भेजी गई थी

-- ऐसे जिलों में जहां कोरोना मामलों की पॉजिटिविटी 10% या अधिक है

-- साथ ही ऑक्सीजन वाले या आईसीयू वाले 60% बिस्तर भरे हुए हैं

-- पीएम ने दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की

-- रेमेडिसविर सहित दवाओं के उत्पादन में तेजी से वृद्धि के बारे में बताया गया

-- अगले कुछ महीनों में टीकाकरण और वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने के तरीकों की समीक्षा की

-- करीब 17.7 करोड़ वैक्सीन राज्यों को मुहैया कराया गया है

-- प्रधानमंत्री ने राज्यवार वैक्सीन के नुकसान की भी समीक्षा की

-- 45 वर्ष से ऊपर के करीब 31 प्रतिशत लोगों को कम से कम एक खुराक दी गई है

-- टीकाकरण की गति में कोई कमी नहीं आए

-- लॉकडाउन के बावजूद टीकाकरण के लिए नागरिकों को सुविधा दी जानी चाहिए

-- टीकाकरण में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों को किसी अन्य काम में नहीं लगाया जाना चाहिए

-- बैठक में राजनाथ सिंह, अमित शाह सहित कई अन्य मंत्री और शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे

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-- कृषि मंत्रालय ने दालों के उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के लिए आगामी खरीफ सत्र 2021 के लिए एक विशेष खरीफ कार्यनीति तैयार की है। इसके तहत दलहन फसलों के बुआई क्षेत्र को बढाने के लिएकेंद्रीय बीज एजेंसियों या राज्‍यों में उपलब्‍ध अधिक उत्‍पादन देने वाली किस्‍मों के बीज नि:शुल्‍क बांटे जाएंगे। आगामी खरीफ 2021 के लिए 82 करोड 1 लाख रुपये की लागत से बीजों की 20.27 लाख से अधिक मिनी किट वितरित किए जाने का प्रस्‍ताव है। यह संख्‍या पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 10 गुणा अधिक है। तुअरमूंग और उड़द का उत्‍पादन और उत्‍पादकता बढाने के लिए वितरित की जाने वाली इन मिनी किट का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। इन मिनी किट की मदद से अगले खरीफ सत्र में पूरे देश में 4.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुवाई की जा सकेगी। कृषि मंत्रालय ने कहा है कि इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों के प्रशिक्षण के लिए कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों को भी लगाया जाएगा। कृषि मंत्रालय के अनुसार देश अब भी लगभग 4 लाख टन तुअर60 हजार टन मूंग और लगभग 3 लाख टन उड़द का आयात करता है। इस विशेष कार्यक्रम से इन दालों के उत्‍पादन में काफी बढ़ोत्तरी की जा सकेगी। इससे आयात पर बोझ कम होगा और देश दलहन उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर बन सकेगा।

(होल्ड)

< हेडर- दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता

-- कृषि मंत्रालय ने आगामी खरीफ सत्र 2021 के लिए विशेष कार्यनीति तैयार की

-- दलहन फसलों के बुआई क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा

-- अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के बीज निःशुल्क बांटे जाएंगे

-- 82.01 करोड़ की लागत से बीजों के 20.27 लाख मिनी किट बांटे जाएंगे

-- ये संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग 10 गुणा अधिक है

-- तुअर, मूंग और उड़द के उत्पादन के मिनी किट का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी

-- पूरे देश में 4.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुवाई की जा सकेगी

-- कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा

-- कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों को लगाया जाएगा

-- देश में अब भी 4 लाख टन तुअर, 60 हजार टन मूंग और 3 लाख टन उड़द का आयात

-- विशेष कार्यक्रम से दालों के उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी होगी

-- आयात कम होगा और देश दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा >

 

 

 

The Indian Army has been at the forefront of COVID response at the national level. While the Army has ensured own force preservation, medical care to veterans and their dependents, it has also deployed considerable medical resources to assist civil authorities especially at the five COVID hospitals already functional or in the process of being established at Delhi, Ahmedabad, Lucknow, Varanasi and Patna.

Inorder to coordinate multiple facets of staffing and logistics support, an exclusive COVID Management Cell under a Director General rank officer has been established which reports directly to the Vice Chief of Army Staff. This will bring in greater efficiency in coordinating real time responses to address exponential rise in COVID cases across the country including Delhi where assistance to civil administration in the form of testing, admissions in military hospitals and transportation of critical medical equipment etc are already being provided.

Indian Army remains committed to support the National efforts in fighting the COVID pandemic.

 

सेना कोविड महामारी के दौरान सेवा मुहैया कराने में राष्ट्रीय स्तर पर तेज गति से काम कर रही है। सेना जहां एक ओर जहां स्वयं अपने सैन्य बल, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के देखभाल का काम कर रही है, वहीं चिकित्सा संसाधनों को मुहैया कराने में प्रशासन के अधिकारियों की मदद कर रही है। इस कड़ी में सेना की भूमिका दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, वाराणसी और पटना में बने या बन रहे कोविड अस्पतालों के सिलसिले में अहम रही है। सेना ने CU

 

 

 

स्टाफिंग और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के कई पहलुओं को समन्वित करने के लिए, एक महानिदेशक रैंक के अधिकारी के तहत एक विशेष COVID मैनेजमेंट सेल की स्थापना की गई है, जो सीधे सेना प्रमुख के कर्मचारियों को रिपोर्ट करती है। यह दिल्ली सहित देश भर में COVID मामलों में तेजी से वृद्धि को संबोधित करने के लिए वास्तविक समय प्रतिक्रियाओं के समन्वय में अधिक दक्षता लाएगा, जहां परीक्षण के रूप में नागरिक प्रशासन को सहायता, सैन्य अस्पतालों में प्रवेश और महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के परिवहन आदि पहले से ही प्रदान किए जा रहे हैं। COVID महामारी से लड़ने में राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करने के लिए भारतीय सेना प्रतिबद्ध है।

 


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