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अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है, हार या जीत सोच पर निर्भर करती है । मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है । कल्पना ही सब कुछ है यह जीवन के आगामी आकर्षणों का पूर्व दर्शन है । मनुष्य को सोचने और समझने की अद्भुत क्षमता का जो वरदान प्रभु से मिला है वह किसी अन्य प्राणी को नहीं मिला है । प्रश्न यह उठता है हम इस अद्भुत क्षमता का कितना फायदा उठाते हैं ?*
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है, हार या जीत सोच पर निर्भर करती है । मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है । कल्पना ही सब कुछ है यह जीवन के आगामी आकर्षणों का पूर्व दर्शन है । मनुष्य को सोचने और समझने की अद्भुत क्षमता का जो वरदान प्रभु से मिला है वह किसी अन्य प्राणी को नहीं मिला है । प्रश्न यह उठता है हम इस अद्भुत क्षमता का कितना फायदा उठाते हैं ?**
कर सकते हैं निर्माण :*
कर सकते हैं निर्माण :*
जिंदगी बाह्य घटनाओं, परिस्थितियों, कुदरत और हमारे पुरुषार्थ का स्वतंत्र मिश्रण है । कुदरत के प्रभाव को हम नहीं टाल सकते हैं परंतु कुम्हार की तरह कुछ निर्माण तो अवश्य ही कर सकते हैं । अकाल, भूकंप, बीमारी और दुर्घटनाओं को टाला तो नहीं जा सकता है परंतु हताश होने के बदले उनसे समझौता तो हमें अवश्य ही करना पड़ेगा । हाँ, बुरे कर्म और बुरी आदतों से तो कम से कम हम अपने को बचा ही सकते हैं ।*
जरूरी है मन के भावों और आवेगों पर नियंत्रण :*
जरूरी है मन के भावों और आवेगों पर नियंत्रण :*
हम व्यर्थ ही अनेक प्रकार के काल्पनिक भय निर्माण कर, उनके वशीभूत हो अपनी जीवन- शक्ति नष्ट करते हैं । वास्तव में यह कागज के शेर हैं । आज हमें दृढ़ संकल्प से अपने मनोभावों और आवेगों पर नियंत्रण स्थापित करना ही होगा । क्योंकि प्रत्येक असफलता से यह सीखना होगा कि हमने सफलता के मार्ग से एक अवरोध को हटा दिया है । क्या अब्राहम लिंकन, एडिसन, गांधीजी जैसे हजारों लोगो ने असफलता से हार कर पलायन वृति अपनाई ? नहीं । उन्होंने अपनी असफलता का बार-बार पुनर्मूल्यांकन किया और सफलता हासिल कर जीवन में विजय के प्रति लोगों के सामने एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखा । जब वे सफल हो सकते हैं तो हम क्यों नहीं ?*
अवरोध को चुनौती और मनोरंजन समझना :*
अवरोध को चुनौती और मनोरंजन समझना :*
जीवन सफलता और असफलता का अद्भुत मिश्रण है । यह वह बाधा दौड़ (एक प्रकार का खेल) है जहां असफलता का अवरोध बार बार हमारे सामने आ खड़ा होता है परंतु हमें अवरोध के सामने हिम्मत हार कर घुटने टेकने नहीं हैं । प्रत्येक अवरोध को चुनौती और मनोरंजन समझकर, उमंग-उत्साह के साथ पुनः प्रयत्न के संकल्प की छलांग लगाते लगाते सफलता को अंत में प्राप्त कर लेना ही है । 'बस एक और प्रयास' यह रीति सहज ही सफलता दिला देती है ।*
नया पाने के लिए नया करना होगा :*
नया पाने के लिए नया करना होगा :*
हमारी शान इस बात में नहीं होनी चाहिए कि हम सदा विजय हों बल्कि इसमें है कि गिरने के बाद पूरे उत्साह से फिर से जीतने के लिए उठ खड़े हो सके । कहते हैं भगवान का दिया हुआ कभी अल्प नहीं होता, टूट जाए जो बीच में वह संकल्प नहीं होता, जिंदगी में कभी असफलताओं से हार मत मानना क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता ।*
बताना नहीं है करके दिखाना है :*
बताना नहीं है करके दिखाना है :*
मनुष्य परिस्थिति की नहीं परिस्थिति मनुष्य की रचना है । यदि हम अपने मन की शक्ति को जागृत कर ले तो दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं । हम यह नहीं सोचे कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे, हम क्या कर सकते हैं दुनिया को नहीं बताना है करके दिखाना है । एक रशियन कहावत है "पहले कीजिए, फिर बताइए ।"*
केवल सफलता के बारे में सोचना :*
केवल सफलता के बारे में सोचना :*
असफल होने के कारणों की सूची बनाकर किसी लक्ष्य को हासिल करना असंभव है । ऐसा करने से मन की पूरी शक्ति असफलता के चित्र बनाने में केंद्रित हो जाती है और अंततः असफलता ही हाथ लगती है । इसीलिए जीवन के उन क्षणों को याद कीजिए जब हम सफल हुए थे । केवल सफलता के बारे में सोचना और सफल होने के कारणों की सूची बनाना । ऐसा करने से हम उन सफल तरंगों को ब्रह्मांड तक पहुंचा रहे हैं और ब्रह्मांड हमको वही देगा जो हम चाहते हैं ।*
समय किसी के लिए नहीं रुक सकता :*
समय किसी के लिए नहीं रुक सकता :*
हालात बदलते एक पल भी नहीं लगता । किसी भी वक्त परिस्थिति विपरीत हो सकती है । समय किसी के लिए नहीं रुकता । अगर हम अनुकूल परिस्थिति में हैं तो स्वयं को भाग्यशाली समझना और उस परमपिता परमात्म ऊर्जा के स्त्रोत को धन्यवाद देना और तुरंत काम में लग जाना चाहिए । *
हमें जीतने की आदत बनानी होगी :*
हमें जीतने की आदत बनानी होगी :*
हम जीवन की मुश्किलों से घबराकर लक्ष्य को भूल जाते हैं । कई ओलंपियंस हैं जिनके जीवन में आए कठिन हालातों ने उन्हें हताश किया था परंतु वे टूटे नहीं । हर बार नए सिरे से जुट गए । आत्मविश्वास के लिए अभ्यास जरूरी है, जितना जल्दी हो सके, जीतने की आदत बनाना होगी, लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करना होगा ।
हार का सामना हर किसी ने किया है पर जीत उसी की हुई है जिसने संघर्ष जारी रखा । यदि लक्ष्य हासिल करना है तो भावनात्मक रूप से मजबूत बनना पड़ेगा, नहीं तो मेहनत पर पानी फिर जाएगा । दुनिया में हर इंसान को मनचाही चीजें नहीं मिलती । जैसी भी परिस्थिति हो, जीतने के लिए जुनून चाहिए ।










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