आख़िरकार एक कुली से शहंशाह बनने का उनका आखिरी रास्ता जो था. उनकी परवरिश भी ऐसी हुई कि कोई दीवार कोई जंज़ीर उनके रास्ते का पत्थर नहीं बन सकी. वह राजनीति में इंक़लाब लाना चाहते थे लेकिन उन्हें समझ आ गया यहॉ बंधे हाथ कुछ नहीं किया जा सकता. उन्हें राजनीति से अलग किया दो अनजाने राम बलराम ने
Thursday, March 26, 2026
अमिताभ बच्चन की फिल्मों के नाम खोजिए...
लेकिन अमर अकबर एंथनी की वजह से इनके बीच दोस्ताना हो गया और फिर इन्हें मुक़द्दर का सिकंदर बनते देर नहीं लगी पर क़िस्मत की बात बरसात की एक रात में एक डॉन इनके पीछे मिस्टर नटवरलाल की तरह पीछे पड़ा मजबूर होकर यह भागे लेकिन ठोकर लंग गई, नसीब अच्छा था बच गए. कामयाबी का सिलसिला चला तो अभिमान भी हो गया पर चुपके चुपके ज़िंदगी के अग्निपथ ने सिखा दिया कि जुर्माना भी भरना पड़ता हैं, ख़ून पसीना भी बहाना पड़ता हैं, ज़मीर की आवाज़ भी सुननी पड़तीं है, यूँ ही लोग बेमिसाल नहीं होते, ख़ुदागवाह हैं.
आनन्द की बात हैं पा की वजह से यह कई बार बॉम्बे टू गोवा गए वर्ना यह जानते हैं कि यहॉ अंधा क़ानून हैं कालिया बनते देर नहीं लगती. अब रोटी कपड़ा और मकान तो सबको चाहिए उसकी ज़िम्मेदारी रेशमा और शेरा ने संभाली तो सबके दिल शोले जैसे जल उठे. फिर एक दिन मिली से मुलाक़ात ने इन्हें उनका परवाना बना दिया और फ़रार होकर इन्होंने शादी कर ली. गुड्डी जैसी बिटिया पाकर यह निहाल हो गए लेकिन जल्दी यह सब कस्में वादें भूल गए. ज़िंदगी त्रिशूल बन गई.
ख़ैर है मामला अदालत तक नहीं पहुँचा. कभी कभी ऐसा भी होता हैं. गंगा की सौगंध खाकर जान बचाई
मर्यादा की रेखा खींची वर्ना दुनिया बेशर्म कहती. काला पत्थर काला पत्थर ही होता हैं चाहे उसे कितनी ही शान या शक्ति से सँभाला जाए. इन्हें लावारिस बच्चों से बड़ा याराना सा लगता है.
उनके लिए तो यह बाग़वान से हैं. इन्हें भी तब कभी ख़ुशी कभी ग़म सा लगता है जब कोई इनके लिए नमक हलाल नहीं नमक हराम सा व्यवहार करता हैं, अपने आपको ग्रेट गैंबलर समझता हैं या सत्ते पे सत्ता में फँसाता है.
यह महान देश प्रेमी भी है नास्तिक तो बिलकुल नहीं. अब यह कह सकते हैं मैं अभिनय का तूफॉन हूँ जादूगर हूँ, यह कहने के लिए मैं आज़ाद हूँ आज का अर्जुन हूँ.
हिंदुस्तान की क़सम आप बड़े मियाँ छोटे मियाँ नहीं पूरे मेजर साहब जैसे हो लाल बादशाह हो सूर्यवंशम जैसे हो.
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